कसडोल : जंगल सफारी के सीएफ करेंगे बारनवापारा में बाघों का रीलांच ,,,,,,डीएफओ का फोकस वन्य प्राणियों के संरक्षण पर नहीं,,,,,डीएफओ ध्यान नहीं दे रहे हैं इस वजह से बारनवापारा में टाइगर को रिलांच करने जैसा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अटका हुआ है।,,,,,
कसडोल : बारनवापारा और भोरमदेव अभयारण की जिम्मेदारी अब जंगल सफारी के सीएफ संभालेंगे। दोनों अभयारण उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीसीएफ के अधीन होंगे, लेकिन सीधा नियंत्रण जंगल सफारी के सीएफ का होगा। अभी तक दोनों अभयारण बलौदाबाजार और कवर्धा डीएफओ के अधीन थे। अब दोनों जिलों के डीएफओ से इन अभयारणों का सीधा नियंत्रण छिन लिया गया है। डीएफओ ध्यान नहीं दे रहे हैं इस वजह से बारनवापारा में टाइगर को रिलांच करने जैसा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अटका हुआ है। अब जंगल सफारी के सीएफ बाघों को बार के जंगलों में रीलांच करने के अहम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे।
वन विभाग की ओर से इस बारे में आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में बारनवापारा और भोरमदेव अभयारण के अलावा रायगढ़ स्थित गोमार्डा अभयारण का प्रशासकीय नियंत्रण वहां के डीएफओ से छिनकर अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व बिलासपुर के जिम्मे दे दिया गया है। वन विभाग से इस आदेश के जारी होने के बाद से कई तरह की चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि डीएफओ का पूरा फोकस टेरिटोरियल पर ही रहता है। यानी वे पौधों के संरक्षण और पौधारोपण के साथ उसी से संबंधित योजनाओं पर ही ध्यान देते हैं। आमतौर पर वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए बजट भी टेरिटोरियल की तुलना में काफी कम रहता है। इसी वजह से वन्य प्राणियों के लिए बेहतर सिस्टम विकसित नहीं हो पा रहा है। इन्हीं खामियों को देखते हुए डीएफओ टेरिटोरियल अलग करने का निर्णय लिया गया है।
कागजों से बाहर नहीं आया बाघों का प्लान बार नवापारा में बाघों को नए सिरे से बसाने का प्लान है। इसके लिए मप्र और महाराष्ट्र से बाघों का जोड़ा लाने की सहमति भी मिल चुकी है। उसके बाद भी अब तक बार नवापारा अभयारण में इसे लेकर फील्ड में कोई काम शुरू नहीं हुआ है। इसकी सबस बड़ी वजह यही बतायी जा रही है कि डीएफ दूसरे प्रोजेक्ट में इतना व्यस्त रहते हैं कि इस ओर ध्यान नहीं दे पाते।


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