कसडोल: कसडोल विधानसभा में इन बार त्रिकोणी मुकाबला के आसार,,,,कांग्रेस भाजपा जीत के लिए आश्वस्त तो एक एक वोट के लिए निर्दलीय प्रत्यासी कर रहे है जोर आजमाइश,,,,, आज तक राष्ट्रीय पार्टी ही जीत दर्ज की है।।।।।।।।

कसडोल: कसडोल विधानसभा में इन बार त्रिकोणी मुकाबला के आसार,,,,कांग्रेस भाजपा जीत के लिए आश्वस्त तो एक एक वोट के लिए निर्दलीय प्रत्यासी कर रहे है जोर आजमाइश,,,,, आज तक राष्ट्रीय पार्टी ही जीत दर्ज की है।।।।।।।।


कसडोल :  इन दिनों छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव चरम सीमा पर है। मतदान दो चरणों में होगा पहले चरण का मतदान 7 नवंबर को होना है तो वही दूसरा चरण का मतदान 17 नवंबर को होगा। हर राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत के लिए कोशिशो में जुटा हुआ है। बात करते हैं छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े विधानसभा कसडोल विधानसभा क्षेत्र का। इस विधानसभा क्षेत्र में 350 से अधिक गांव आते हैं। 3 लाख 61 हजार 208 मतदाता है जिसमें पुरुष 181105 महिला 180100 और थर्ड जेंडर तीन है। एवम 402 मतदान केंद्र हैं। कसडोल विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में अभी तक हुवे चुनाव में एक भी निर्दलीय उम्मीदवार जीत नहीं पाये है। यहां हमेशा ही राष्ट्रीय पार्टियां ही जीत दर्ज करती आ रही है। चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा हो। प्रमुख दल के प्रत्याशी को ही यहां पर जीत हासिल होती रही है।

कसडोल विधानसभा सीट में पिछले चार बार के चुनाव में तीन बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। सिर्फ एक बार 2013 में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। बहरहाल कसडोल विधानसभा में अब तक कई निर्दलीय उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा चूके है, जिसमें कई शख्सियतें भी शामिल रही है। लेकिन शख्सियतों के आगे भी याहा पर राजनीतिक दल को ही जनता ने महत्व दिया है। इससे यह स्पष्ट होती है कि कसडोल विधानसभा में व्यक्ति नहीं हमेशा से ही पार्टी विशेष रही है। निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा। चुनाव में कई ऐसे निर्दलीय प्रत्याशी भी होते है, जिन्हें सौ वोट भी नहीं मिलते है। हालांकि, इनके चुनाव लड़ने से आयोग का खर्च जरूर बढ़ जाता है। वही, इस बार कांग्रेस से संदीप साहू को चुनाव मैदान में उतारा गया है, तो दूसरी ओर भाजपा ने धनीराम धीवर को चुनाव में उतारा है। दोनो राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा जनता कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी से भी उम्मीदवार उतारा गया। वही, काफी दिनों से प्रचार-प्रसार में लगे कांग्रेस पार्टी के गोरेलाल साहू जो जिला पंचायत सभापति है, तथा अन्य विभिन्न पदों पर आसीन हो चूके है। कांग्रेस पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमा रहे है। लेकिन निर्दलीय के लिए राह आसान नहीं है।क्योंकि कसडोल विधानसभा क्षेत्र बड़ी विधानसभा क्षेत्र होने के कारण एक हजार से भी ज्यादा कार्यकर्ताओं की जरूरत होगी। पोलिंग बूथों पर एजेंटो की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। इन सबका बजट भी निश्चित तौर पर भारी होगा। इसलिए निर्दलीय प्रत्याशियों की राह आसान नही होगी। खासतौर पर कसडोल विधानसभा एक बड़ी विधानसभा क्षेत्र के रूप में गिनी जाती है। यहा हमेशा ही राष्ट्रीय पार्टियों का ही कब्जा रहता है। बहरहाल इस बार कसडोल विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय संघर्ष होने के आसार नजर आ रहे है।

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