आदिवासी गोंड समाज टोनाटार चक का वार्षिक बैठक हुआ संपन्न ,,,,,,,,बैठक में वार्षिक सम्मेलन में हुए आय व्यय रामकिशुन छेदइईया के द्वारा पेश किया गया ,,,,,,वही सामाजिक उत्थान, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, 12-13 मार्च 2022 को सामुहिक विवाह के रूपरेखा तैयार किया गया,,,,

आदिवासी गोंड समाज टोनाटार चक का  वार्षिक बैठक हुआ संपन्न ,,,,,,,,बैठक में वार्षिक सम्मेलन में हुए आय व्यय रामकिशुन छेदइईया के द्वारा पेश किया गया ,,,,,,वही  सामाजिक उत्थान, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, 12-13 मार्च 2022 को सामुहिक विवाह के रूपरेखा तैयार किया गया,,,,

अर्जुनी रूपेश वर्मा

आदिवासी गोंड समाज टोनाटार चक माँवली महासभा के द्वारा एक दिवसीय वार्षिक सम्मेलन ग्राम गुर्रा के  बुढ़ादेव के प्रांगण में सोमवार को आयोजित हुई | बैठक में  वार्षिक सम्मेलन की समीक्षा हुई | बैठक में गोंड समाज के प्रत्येक गाँव  पदाधिकारी उपस्थित थे | बैठक में वार्षिक सम्मेलन में हुए आय व्यय रामकिशुन छेदइईया के द्वारा पेश किया गया |  जिसमें सामाजिक उत्थान, शिक्षा रोजगार स्वास्थ्य, 12-13 मार्च 2022 को सामुहिक विवाह के रूपरेखा तैयार ,  बालक बालिकाओं के निशुल्क कोंचिग सेंटर,  पदाधिकारियों का कार्यकाल पूर्ण होने पर पुनः सर्वसम्मति से पदाधिकारी नियुक्ति, चुनाव न होकर मनोनयन जो आदिवासी समाज में चले आ रहा है यथावत व नवनियुक्त पदाधिकारी का चयन किया गया | 
आज के भागमभाग जिंदगी में जहाँ अपनों के लिए घर-परिवार के लिए समय नहीं दिया जाता, वही समाजिक कार्य में लिप्त समाज सेवक अपने तन-मन-धन समर्पित करते हुए |
समाज कि सेवा में सबकुछ लगा देते हैं क्या रात और क्या दिन बस समाज की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर देते हैं ऐसे जीती जागती मिसाल बलौदाबाजार के आदिवासियों में देखने को मिलता है| 
 *इष्टदेव बुढ़ादेव  के सुमरन पाठ से शुरूआत हुआ बैठक* 

इष्टदेव आदिशक्ति बुढ़ादेव  अपने पुरे परिवार समाज की रक्षा करते हुए, सुख-समृद्धि प्रकृति की दिशा में ले जाते हुए सामाजिक गोंदेला व्यवस्था को संचालित करते हुए | गण्ड जीवों को दिशा निर्देश कर सत्य की राह पर चलने के लिए आदेशित किया है | 
प्रकृति ही सत्य है और प्रकृति के पुजारी ने हमेशा प्रकृति की अनुकूल पद चिन्हों पर चला है, प्रकृति महान शक्ति है जो पुरे विश्व जगत की निर्माण किया 
जब प्रकृति का जन्म हुआ तब साथ में आदिवासी भी जन्म हुआ होगा तभी गहरा रिश्ता नाता है तभी आदिवासी कब से आया दुनिया में कोई नहीं बता सकता | 
प्रकृति के इस अटुट संबंध में आज भी प्रकृति के पुजारी कहलाया जा रहा है इसी तारतम्य में कार्यक्रम की शुरुआत ईष्टदेव बुढ़ालपेन के सुमिरन पाठ से किया गया | 

( *मनोनयन से पदाधिकारियों का हुआ चयन)* 

राजनीति चुनाव जैसे समाजिक चुनाव में भी लोग खर्चीला चुनाव बना लिया जाता है तो सोच सकते हो पेसो की बर्बादी पदाधिकारी उम्मीदवार का ही नहीं वरन् समाज का होता है | 
रूढ़िवादी परंपरा को मानने वाले आदिवासियों ने कहा कि आदिवासी रूढ़िवादी है अपनी खुद की प्रथा, संस्कृति, धर्म और सरकार होती है आदिवासी समाज में चुनाव नहीं होती बल्कि मनोनयन होता है, सीखने को जरूर मिलता है |
 जहाँ पर प्रत्याशी लोग प्रचार प्रसार व अन्य समाग्री और वोटरों को रिझाने के लिए अपनी पुरी ताकत झोंक देते हैं, खुद की तो नुकसान होता ही है | समाज व सरकार की भी नुकसान होता है, आदिवासियों की रुढ़िवादी परंपरा से सीख लेनी चाहिए |
बैठक में आये हुए 17 गाँव के रायपंचो के द्वारा पदाधिकारी के कार्यकाल समीक्षा करके पुनः यथावत चक पदाधिकारी का मनोनयन किया गया
 जिसमें दौलत कुंजाम अध्यक्ष, गजेंद्र कतलम दीवान, रामकिशन छेदईया सचिव, अमर सिंह ठाकुर महामंत्री, रामायण नेताम सलाहकार, बालाराम कोषाध्यक्ष, नंदकुमार मरई संरक्षक ( मल्दी), रूपेश नागवंशी मीडिया प्रभारी, तोप सिंह प्रचार प्रचारमंत्री, रायपंचो के नाम देवकुमार छेदईया, संतोष मरई ( अर्जुनी), पंचराम ध्रुव ( खैरताल ), साधराम ध्रुव ( टोपा), गजानंद मरई ( गोढ़ी  ), अमर नेताम ( मुढ़ीपार), रामलाल छेदईया ( भद्रपाली), जेठूराम नेताम ( रवान ), मालिक राम ( मगरवाय ), मनोहर मरई (खैरी ), धनीराम छेदईया ( गुर्रा), हेमराम नेताम ( नेताम), भरत कतलम ( परसाडीह ), नंदकुमार मरई ( मल्दी ), दशरथ नेताम ( देवरानी), हीरालाल छेदईया (खम्हरिया), हरिकीर्तन छेदईया ( अमलीडीह) आदि सैकड़ों के संख्या में सगा समाज के लोग उपस्थित थे |

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ