कसडोल - वन्यजीव अपराध में संलिप्त फरार आरोपी ने किया आत्मसमर्पण,,,,,गिरफ़्तार कर किया गया जेल दाखिल,,,,,वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई,,,,



कसडोल - वन्यजीव अपराध में संलिप्त फरार आरोपी ने किया आत्मसमर्पण,,,,,गिरफ़्तार कर किया गया जेल दाखिल,,,,,वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई,,,,

कसडोल -  वन अमले की तलाशी के दौरान घर से फरार आरोपी शिवसेवक विभाग के तलाशी अभियान से लगातार बढ़ते दबाव के कारण अंततः न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय के आदेशानुसार उसे गिरफ्तार कर जिला जेल बलौदाबाजार में दाखिल किया गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार  वन्यजीव अपराधों की रोकथाम हेतु प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर वन मण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील के निर्देश पर विगत जनवरी माह में वन विभाग की टीम द्वारा ग्राम अल्दा में तलाशी कार्यवाही की गई ।  तलाशी के दौरान संदिग्ध व्यक्ति शिवसेवक के घर से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) की अनुसूची-I में संरक्षित वन्यजीवों से संबंधित  तेंदुए के दांत, जंगली जानवर के मांस के टुकड़े, जी.आई. तार तथा भाले सहित अन्य सामग्री जब्त की गई। तलाशी के दौरान मुख्य आरोपी शिवसेवक  मौके से जंगल की ओर फरार हो गया। आरोपी की तलाश के लिए वन विभाग द्वारा तत्काल टीम गठित कर सघन खोज अभियान चलाया गया तथा डॉग स्क्वाड की सहायता भी ली गई। किन्तु आरोपी के घने जंगल की ओर भाग जाने तथा शाम हो जाने के कारण उसे उसी दिन पकड़ पाना संभव नहीं हो सका। इसके पश्चात वन विभाग द्वारा आरोपी की लगातार तलाश जारी थी। 

विभाग  के लगातार की जा रही खोजबीन के चलते मुख्य आरोपी शिवसेवक पिता परदेशी राम गोड, निवासी ग्राम अल्दा, पोस्ट भिभोरी, तहसील कसडोल  ने अंततः बुधवार वार को  न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कसडोल के समक्ष आत्मसमर्पण किया।  न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार किया गया तथा आवश्यक पूछताछ एवं कागजी कार्रवाई पूर्ण करने के उपरांत उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे जिला जेल बलौदाबाजार में जेल दाखिल किया गया।

प्रकरण में एक अन्य सहयोगी आरोपी मेहतारू पिता सरजू (उम्र 43 वर्ष) पूर्व से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। उसके घर की तलाशी के दौरान सॉफ्ट शेल कछुए का प्लास्ट्रॉन, जो कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) की अनुसूची-I में संरक्षित प्रजाति है, तथा लंगूर की खोपड़ी, जो अनुसूची-II में संरक्षित प्रजाति है, बरामद की गई थी।इस प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) के प्रावधानों के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है तथा मामले की जांच जारी है।

 कार्यवाही में  उप वनमंडलाधिकारी निश्चल शुक्ला ,  वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुश्री श्वेता कुमारी सिंह के नेतृत्व एवं परिक्षेत्र सहायक  जय किशन यादव,नटवर लाल वर्मा सहित उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की भूमिका रही।

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